Hindi Quote in Poem by અધિવક્તા.જીતેન્દ્ર જોષી Adv. Jitendra Joshi

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नमन मंच


परछाई

सोने से जागते तक,
दिन से रात तक,
सुबह से शाम तक,
साथ साथ जो साथ निभाती,
कहीं वो मेरी परछाई तो नहीं।

दुख सुख का अहसास दिलाती,
हँसी के लम्हो का साथ निभाती,
बरसात में साथ भीगती जाती,
ठंड में साथ मे सो जाती,
कहीं वो मेरी परछाई तो नहीं।

हर मौसम में साथ न छोड़ती,
गर्मी में पसीने से तर रहती,
दिल का रिश्ता बन गया उससे,
कोई भी पल पीछा न छूटता जिससे,
कहीं मेरी वो परछाई तो नहीं।

साया बन साथ निभाती है,
काया में समाई जाती है,
वो सुखद अहसास है,
रहती जो मेरी पास है,
कहीं वो मेरी परछाई तो नहीं।

हां साया कहूँ या परछाई,
जीवन के संग संग है,
मेरी दिल मे बसी अंतरंग है,
इसके विभिन्न रंग हैं,
कहीं वो मेरी परछाई तो नहीं।


शोभेन्द्र पटेल"राज"

Hindi Poem by અધિવક્તા.જીતેન્દ્ર જોષી Adv. Jitendra Joshi : 111708579
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