वो बोला, "मुजे गंगा मैया ने बुलाया है"
बहती लाशो का बोझ गंगा ने उठाया है।।
वो घूम रहा था, बांग्ला, तमिल, आसाम,
करना था पहले लोगो की सुरक्षा का काम,
बंगाल में उसकी सत्ता लालसा ने हराया है।।
कितनी हत्या हो गई, तुम्हारी सिस्टम में,
रैलियां तुम्हारी बदल गई कोरोना बम्ब में,
जवान बेटे का जनाजा बाप ने उठाया है।।
रामराज्य की बात जोरज़ोर से करते थे,
क्यो बंध हो गया मुँह, निर्दोष मरते थे,
तुम्हारे सब ठीक पर, मातम हमने मनाया है।।
अनाथ हो गये कितने कितने नन्हे बालक,
जुमले फेकने में व्यस्त रहा प्रजा का पालक,
मनोज प्राणवायु की समाप्ति ने लिखाया है ।।
मनोज संतोकि मानस