भटक रहा हूं सुकुन की तलाश में..... देखता हूं मंदिर में, मस्जिद में, घिरजा में, गुरु घर में.... पर तलाश खत्म हुई नहीं... देखता हूं पहाड़ों में, जंगलों में, बहती हुइ नादिया में, समंदर के किनारे में... पर तालाश खत्म हुईं नहीं.... थका हारा चेहरे पर निराशा लिए पहुंचा घर... मां की गोद में सर रख सोया ....अब समझ आया ... भटक रहा जिसकी तलाश में ..वो तलाश खत्म हुईं मां की गोद में.......#सुकून ..