"वक्तने किया क्या हसीन सितम".... आज की तारिखमे, कितना सही है यह गीत
कॅरोना ने छीन लिया है, हर किसीका सुख चैन; हार ही है, कहीभी दिखती नही है जीत
चारों ओर है भयंकर बीमारी और मोत फड़फड़ाती है हर दिये की जीवन ज्योत
हर मानव, डर के जी रहा है; न जाने कब आये उसको या उसके अपनोको मोत
डॉक्टर, नर्स, वार्ड बॉय की जान को रहता है सतत मोत का खतरा, फैली है एक दहशत
न जाने कब आ जाये मोत का फरिश्ता, लगाने उन्हें गले; यह मौतके खेलमे, होती है चित्त या पट
ऐ मालिक मेरे, याचना करू मैं तुझसे, यह दुनियां है तेरी, अब तू ही उसे बचा सकता है
माफ कर दे तेरे इस इंसांको, घमंड उसका चकना चूर हो गया है; अब देख, वो बिलखता है ।
Armin Dutia Motashaw