Hindi Quote in Poem by महेश रौतेला

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बर्षों पहले
तुम्हारे अन्दर अनेक पगडण्डियां थीं
जहाँ मैं आया जाया करता था,
नदी का किनारा था
जिसके साथ साथ चलता था,
हिमालयनुमा पहाड़ था
जिसे चढ़ा करता था,
एक सुन्दर दृष्टि थी
जिसे देखा करता था,
अनेक पहेलियां थीं
जिन्हें सुलझाया करता था,
कपकपाती ठंड थी
जिसे गरमाहट देता था,
ऊब भरी बेरोजगारी थी
जिसे काम देता था,
अपूर्ण और असहज आकांक्षायें थीं
जिन्हें पूर्ण और सहज करता था,
एक घर था
जहाँ उठा- बैठा करता था,
एक बचपन था
जिससे खेला करता था।
बर्षों पहले
मेरे अन्दर अनेक झाड़ियां थीं
जिन्हें तुम काटा करते थे।

***महेश रौतेला

Hindi Poem by महेश रौतेला : 111686589
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