•?((¯°·..• कलम-ए-इश्क •..·°¯))؟•
मीठी मीठी बातों ने तेरी ,
ऐसा रंगा मुझको जैसे गुलाल,
तीखी सी नजरो ने तेरी,
ऐसा डाला रंग ये लाल,
प्यार की बारिश में मै तेरी,
भीगा ऐसा जैसे कोई वर्षा काल।
तेरे जुल्फो की वो लट, होठों की वो लाली तेरी ,
ऐसे मै खोया कि कर गए होंठ तेरे मुझको बेहाल।।
नजरे तेरी , बाते तेरी, यादें तेरी, चेहरे की मुस्कान हाँ तेरी
तेरे रंग में मै रंगा हूं ऐसे
कि क्या रंगेगा ये मुझको होली का हाल
होली में अब कहां वो बात है तेरी
बिन होली के भी तूने हाँ मुझको ,
रंग दिया खुद में ऐसा कि
क्या छूटेगा अब इश्क का रंग लाल।।
-लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻