मैरी कुछ लाइन कंगना जी के नाम
ए नारी तुझे कीस रुप से जानु,
तेरी मुस्कुराहट फुल खिल जाते है,
तेरे रुठने संसार रुठ जाता है।
जगत को सुख शांति प्रदान करने
वाली लक्ष्मी तु, प्यार का सागर तु,
जब तेरी आंखें आक्रोश से भरी हो,
तब सिंह वाहिनी रणचण्डी तु.
सुशांत की मौत पर पुरी दुनिया,
मैं शौक का मातम,सब लोग के मुंह
पे ताला, ए सब जानकर,भी कोई आगे न आया,
तब एक शेरनी ने जुल्म के खिलाफ
आवाज उठाई, सुशांत के परिवार को
न्याय दिलाने की ठान जो ली थी,
एक शेरनी ने पुरी दुनिया को सोचने पर,
मजबूर कर दिया, एक शेरनी कीडो पर पडी भारी,
कुछ कायरो को स्त्री शक्ति का परिचय दिया
कुछ कायरो कि कायरता काबिले तारीफ हैं",
जुल्म के खिलाफ उठी अवाज को दबाने के लिए
कीसी का घर तोड़ दो,या मरवा दो ऐ गेम
आपकी मुझे समझ न आयी,
ए राजनीति हम पर न आजमाये साहाब,
ओ दरिंदों खुद के पीछे नेता का नकाब हटा दो,
याद करो वो दिन वोट डालवाने के लिए किये गए
वादों को ,पवित्र न्याय संविधान का खुरशी
बचाने लिए,मजाक न बनाएँ,ए मेरा निवेदन है
कंगना रनौतजी को बोलने का पुरा हक है,
वो आझाद भारत मे रहती हैं,जो सच है
इसे दुनिया के सामने लाने मेँ हर्ज क्या है।
वाणी स्वतंत्रता लोकशाही का विभिन्न अंग है
कंगनाजी आप संघर्ष करे ,हम सब आपके साथ है।
शैमी ओझा "लफ्ज़"