भौतिक युग में तुम कभी राम बन कर आओ न।
कुछ दिन ही सही मेहमान बन कर आओ न।
अपने ही अपनों को धोखा देते हैं लोग यहाँ।
कृष्ण सुदामा जैसी यारी को तुम सिखलाओ न।
नित् नए पैतरे आजमाते दुनियाँ को धोखा देने को।
भटक चुके राही को तुम सही रास्ते लाओ न।
जीवन भोग विलास में डूबा भौतिकता हावी है।
परोपकार,नैतिकता और सदाचार बतलाओ न।
-Arjun Allahabadi