बेख़बर है वो मेरी खामोशियों से,
वो हर रोज मुझे बात करता देखता है..
वो नहीं समझ पाता तकलीफें मेरी,
वो हर रोज मुझे हंसता जो देखता है..
इधर उधर तकती मेरी हर नज़र से वाकिफ है,
हर क़दम,हर अदा,इन अदाकारियों से वाकिफ़ है,
वो वाकिफ़ है कि, आज़ाद, बेपरवाह हूँ मैं..
पर नहीं देख पाता इस घुटन, इस बेचैनी को..
वो हर रोज़ मुझे सांस लेता जो देखता है..
-Sarita Sharma