भागवत् में श्री कृष्ण ने कहा हे की सच्चा प्यार ही इन्सान की हर बुराईया को बदल सकता है,
और
आज का प्रेम बस एक तरफ़ा हो चुका हे,साथ में रह कर भी एक तरफ़ा प्रेम एक अपमान से कम नहीं,
जो सच्चा प्यार करते हे और उसे समझा नहीं जाता तो उसे साबरमती जेसी पवित्र नदी में ख़ुद को उसकी गौद में सोना पड़ता है,
क्याँ 21 मी सदी मैं प्यार महोब्बत जैसी अनुभूति खत्म हो चुकी हे,,,?
क्याँ सच्चा प्यार करना इतना बड़ा गुनाह है कि उसको हँसते हँसते ख़ुद को दुनिया छोड़कर जाना पडे,
समय दिजीये उनको और ख़ुद को ताकी प्यार बना रहे किन्तु इस तरह का निर्णय लेना उचित नहीं हे ख़ास कर के उनके लिए जो आपके साथ खड़े हे,आपको समझते है...
श्री राधै राधै