पहले टूट कर चाहो, किसी को, फिर वो छोड़ जाए आपको, और फिर और टूट जाओ, ऐसे लगता है, जैसे हम गीली मिट्टी हैं,और ऊपर वाला हमें तोड़ मरोड़ कर मुलायम बना रहा है, जो सख़्त हो जाते हैं। वो ख़त्म हो जाते हैं, और जो नर्म ही रहते हैं, वो कुछ बन जाते हैं जिंदगी को इतना ही समझा, मैंने तो,
-प्रवीण बसोतिया