कहते हैं जिसे लोग फरवरी(मोहब्बत) का महिना।
मिलते हैं आठ रोज हर एक मोड़ कमीना।।
पढ़ा-लिखा न ऐसे कभी thought सफी़ना।
कलियों पे होते चोट जो जाए भी कही ना।।
कुछ लोगों का है ये मन की मौज़ छिपी ना।
हैं लोग जो ऐसे तो.. कहें फिर और क्यूँ? ये क्षद्म महीना।।
-सनातनी_जितेंद्र मन