गजल
नक्शा कोई ओर बना ले,
जात,धरम के लेख हटा ले।
आंगन को महफूज रखेगी,
तुलसी का बिरवा लगवाले।
प्रण प्राणों से प्यारा लगता,
फिर चाहे तो मौत बुला ले।
माटी की गौरव गाथा लिख,
बलिदानी परचम फहराले।
स्वार्थ ने जकङे सब रिश्ते,
प्रेम की चाबी खोलो ताले।
खाली पॉकेट बुढ़ी काया,
देखे कौन पांव के छाले।
दौलत,शोहरत,रिश्ते, नाते,
जिनको मिलता किस्मत वाले।
ओरों को मत ताक मुसाफिर,
आ, अपना घर बार संभालें।
जीना हो तो जी ले 'पूनम',
खुद को करके ईश हवाले।
डॉ पूनम गुजरानी
सूरत