ये माना की दुनिया जज्बात नहीं समझती।
पर ये बात भी तो सच है मेरे दोस्त..
यहाँ सब एक जैसे भी नहीं होते।।
कुछ भावना विहिन तो कुछ भावनाओं से ओतप्रोत होते हैं।
कहीं न कहीं वे ही जीवन के स्त्रोत होते हैं...।
जिन्हें समझकर तुच्छ हम दिन-रात खोते हैं।।
पकड़ लो समय अब भी है बहुत बाकि।
बहा दे भावनाओं को समक्ष उनके ए शाकी़।।
-सनातनी_जितेंद्र मन