उसने कहा 👉👇
समंदर को ढूंढती ...
नदी ना जाने क्यों...
पानी को पानी की ..
ये कैसी प्यास है...??
🌹 मैंने कहा 👉👇
बहुत भटकी होगी दर-ब-दर।
अपनों की तलाश में
कोई और मिला नहीं
समंदर के सिवा।
रूकी ये सोचकर की ये मेरे जीवन की आस है।
🙄और तुम समझ बैठी की
पानी को भी प्यास है।
हकीकत में तो पानी❤️ की ही ❤️प्यास है।
-सनातनी_जितेंद्र