जबरदस्ती लाइक, कमेन्ट और रेटींग देना मुझे कदापि पसंद नही । बहोत से मित्र मैसेंजर में आकर ऐसी ही कुछ प्रकिया करने को कहते है । फिर मजबुरन यह सब करना पड़ता है । वैसे मे यह सब नही भी कर सकता हूं, लेकिन दिल तोड़ना नही चाहता ।
वैसे जिस रचना तक मैं पहुंच जाऊं और उसे ढंग से पढूं, अगर वह दिल को छु जाए तो सिर्फ लाइक, कमेन्ट ही नही अन्य सोशल मीडिया प्लैटफार्म पर उसे उस निर्माता के नाम के साथ पोस्ट/पब्लिश भी करता हुं ।
मातृभारती पर शायद गुजरात के लोग ज्यादा जुडे हुए है । क़ोई-क़ोई मुझसे पूछता है, कहाँ से हो ? उसे मेरा जवाब होता है मैं महाराष्ट्र से हुं । फिर पूछते है गुजराती आती है के नही ! फिर मेरा जवाब नही सुनकर भी क़ोई-क़ोई अपनी गुजराती रचनाएँ मुझसे शेयर करते है !!!
(अब का कहे !!!)
अब सोच रहा हुं, गुजराती सिख ही लूं !