करने तो ज़ाहिर विचार बहोत है
पर कलाम पड़ती थोड़ी कमज़ोर
में तो चहेती हुन गीत सुनना
लेकिन दुनिया संगझती इसे शोर
एक दिन आएगी कलाम में लियाकत
संगझेगी दुनिया इन विचारों की ताकत
लिखूंगी तब तक पंक्तिया यूँ दो चार
तेज़ है मुझे करनी इस कलाम की धार
_shaikh_sabreen_