ब्रंह्मानंद की बानी
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(ताल बनजारा)
शुकदेव कहे मुनिज्ञानी,
सुन भूप भागवत बानी,
!! टेक!!
सुख दुःख अरु जीवन मरन,
सब अपना करना भरनाजी,
कोई करत न किसकी हानी!!१!! सुन भूप
यह दुस्तर भवजल धारा
बिना भजन न हो निस्तारा जी,
हरिनाम सुमर सुखखानी
!!२!! सुन भूप
सुरनर पशु जीव जहाना नहीं भेद कल्पना नानाजी
सब एक ब्रंह्ममय जानी
!!३!! सुन भूप
यह जीव अमर सुखराशी
क्षण भंगुर देह विनाशी जी
ब्रंह्मानंद छोड अभिमानी जी!!४!! सुन भूप भागवत बानी,
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