अचानक आज नजरों में घूम गया वह लम्हा…
जिसे मैं कभी भुला ना सकी…
जिंदगी का कितना बेदर्द था वह लम्हा…
जब रूह और सांसों में किसी एक को चुनना था…
बेइंतहा इश्क था रूह से…
तो सांसों से भी प्यार कम ना था…
किसे चुनूं...?
इसी कशमकश में उलझी हुई मैं
अपनी रूह से दूर हुई…
और सांसों की जीत हुई...
फिर समझ आया कि...
ये जिंदगी तो हमारी होकर भी हमारी नहीं…
जीतें हम अपने लिए नहीं...
अपनों के लिए हैं...
-Naina Gupta