Gujarati Quote in Thought by Narendra Parmar

Thought quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Gujarati daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

सपना

पत्नी अपने पति से कहती है

एक दिन घर पर रहिए आप

बुरा वक्त निकल जाएगा आज़ ।।

रणजीत नई नई शादी हुई थी गंगा से वो दोनों गांव से शहर नोकरी की तलाश में आएं थे, रणजीत अकेला ही लड़का था ना भाई था ना ही बहन थी उनकी सिर्फ उनके मां बाप थे, रणजीत पढ़ा लिखा लड़का था उसने सोचा कि शहर में जाउंगा तो अच्छी नोकरी मिल जाएगी मुझे, वहीं सही सोचकर दोनों पति-पत्नी शहर में आएं थे

गंगा नाम की तरह पवित्र थी सुशील थी संस्कारी थी उसमें कोई कमी नहीं थी, रणजीत नोकरी तलाश करने लगा भगवान की कृपा से रणजीत को अच्छी नोकरी मिल गई, गंगा और रणजीत दोनों ही बहुत खुश थे,उनका घर बहुत अच्छा चल रहा था जो भी पैसा बचता था वो गांव अपने मां बाप को भेज देता था थोड़े पैसे अपने घर खर्च के लिए रखता था ताकि अपने घर में कोई तकलीफ़ ना रहे

ऐसे ही करके पांच छे महीने गुजर गए शहर में, रणजीत ने गंगा से कहा हम अगले हफ्ते गांव जाएंगे,हम गांव में पंद्रह बीस दिन रहेंगे मम्मी पापा के साथ उनका भी सेवा करना जरूरी है,ऐ हमारा फर्ज बनता है, गंगा ने उसमें कहने की क्या जरूरत है हम जाएंगे अगले हफ्ते गांव आप चिंता मत करो में आपका साथ पूरे पूरा दूंगी

एक रात गंगा को बहुत सपना आया वो सुबह उठकर अपने पति से आज़ आप छूट्टी रख दिजिए मुझे बहुत बुरा सपना आया था रात को रणजीत ने कहा गंगा तुम चिंता मत करो मुझे कूंच नहीं होगा तुम्हारा साथ जो मुझे है, फ़िर भी गंगा का दिल नहीं मान रहा था,नहीं जी आप छूट्टी रख दिजिए मुझे अच्छा नहीं लगता है ज़ी आप मेरी बात मान लिजिए

उसी वक्त बोस का फोन आया रणजीत आज थोड़ा जल्दी आना एक मिटिंग करना है हमें, ऐ सुनकर रणजीत ने कहा ओके बोस में आ रहा हूं, रणजीत ने गंगा से तुम फिकर मत करना आज़ में जल्दी आ जाउंगा शाम को हम दोनों बहार खाना खाने जाएंगे

रणजीत गंगा से बाय कहते हुए वो नोकरी पर निकल गया बाईक लेकर, रणजीत आधे रास्ते में ही पहुंचा था और उसका ऐक्सिडेंट हों गया,दो चार मिनट रणजीत मर गया गंगा रणजीत को फोन कर रहीं थीं मगर कौन उठाएगा, वहां कई लोग खड़े हो गए, एक बाजू रणजीत की लाश पड़ी थी और रणजीत का फोन बज रहा था

एक समझदार नागरिक ने फोन उठाया और गंगा से बात किया, गंगा ने तूरंत हीं कहां वो कहां है और आप कौन बोल रहे हों,वो भाई ने कहा उनका ऐक्सिडेंट हों गया है गंगा तूरंत हीं ओटो करके वहां पहुंच गई

गंगा रोते हुए रणजीत से कहने लगी 😭

आज़ आप मेरी बात को मानें होते

तो आज़ से मुझे

विधवा के कपड़े पहनने ना पड़ते ।।

ऐ कहानी और पात्र काल्पनिक है इनका वास्तविक जीवन से कोई लेना देना नहीं है ।।

नरेन्द्र परमार " तन्हा "

Gujarati Thought by Narendra Parmar : 111638958
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now