ख़ुशी मनाऊं या फिर ग़म
कभी कभी हमारी जिंदगी में ऐसा वक्त आ जाता है कि हम खुशियां मनाएं या फिर ग़म ऐसा ही आज़ छोटेलाल के परिवार के साथ हुआ है ।
रामपुर नाम का एक छोटा सा गांव था पुरा गांव खुशहाल जीवन जी रहा था सबका जन जीवन खेती के उपर चल रहा था पुरा गांव खुश था किसी को कोई तकलीफ़ नहीं थी
छोटेलाल के परिवार में उनका लड़का कार्तिक उनकी पत्नी पदमा और कार्तिक की बहेन सुमति छोटेलाल की पत्नी को गुजरें करीब तीन साल हो गए थे मगर छोटेलाल को कोई भी तकलीफ़ नहीं थी ।
मगर सबको मालूम है कि वक्त एक जैसा नहीं होता है उसको बदल ते देर नहीं लगती है बस ऐसा ही छोटेलाल के साथ हुआ है आज़ एक तरफ पदमा के गौद भराएं खुशी का मौका है और एक तरफ से छोटेलाल की तबीयत बिगड़ी लगीं है ।
छोटेलाल कार्तिक से कहने लगे बेटा में बहुत खुश हूं कि मेरे जीते जी ए खुशी का मौका आया है आप सब महेमानो का ध्यान रखो मुझे कूंच नहीं होगा,पदमा के गौद भराएं रश्म पूरी हो गई है सब लोग अपने अपने घर पर चलें गए पदमा के पिताजी ने कहा कि हम अपनी बेटी को घर पर ले जा सकते हैं मगर बहुत समझदार थी उसने कहा कि पापा मम्मी आप जाइए मेरे ससुर जी की तबीयत ठीक नहीं है ।
छोटेलाल की तबीयत दिन ब दिन बिगड़ती जा रही थी छोटेलाल ने कार्तिक से कहा बेटा सुमति की उम्र हो गई है अच्छा लड़का देखकर शादी कर देना आप अब मुझे नहीं लगता है कि में ज़्यादा दिन जी सकता हुं, फ़िर कार्तिक ने कहा आप चिंता मत करो में सुमति की शादी अच्छे लड़के से कराउंगा आप सुमति की चिंता छोड़ दो ऐ सुनकर छोटेलाल खुश हो गए ।
एक तरफ पदमा की तबीयत भी ठीक नहीं थी कार्तिक को दोनों का ध्यान रखना था एक तरफ अपनी पत्नी पदमा एक तरफ अपने पीताजी एक दिन दोनों की तबीयत बिगड़ गई छोटेलाल और पदमा को शहेर के अस्पताल में लेकर गए, डॉक्टर ने कहा कि आपके पिताजी आख़री मुकाम पर हैं आप जाकर मिल लो उनसे कार्तिक गया अपने पीताजी के पास उनसे कहने लगे आप चिंता छोड़ दो में सबका ध्यान रखूंगा ऐ सुनकर छोटेलाल ने अपने प्राण छोड़ दिया ।
दुसरी तरफ पदमा को लड़का हुआ सुमति ने कार्तिक को कहा भाभी को लड़का हुआ है में बुआं बन गई हुं ऐ सुनकर कार्तिक खुश हो गया मगर खुशीयां कैसे मनाएं क्योंकि एक तरफ पीताजी का मौत हुआं है ।।
हमारी जिंदगी में भी ऐसा माहौल आता है कि खुशियां मनाएं या फिर ग़म ।।
नरेन्द्र परमार " तन्हा "