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जा रहा हूँ.. 🙁
*मैं हूँ साल दो हज़ार बीस*
क्षमा करना 😞
नफ़रत स्वाभाविक है ,
छीना जो है बहुत fकुछ...
बच्चों से , पिता को..
बच्चों से , माँ को..
बहन से , भाई को..
पत्नी से , पति को..
ना जाने , कितने
रिश्तों से रिश्तों को..
कारोबार , ऐशो आराम , सुख चैन ,
फ़ेहरिस्त लंबी है.. द्वेष है...
क्रोध है , नाराज़गी है ,
प्रश्न यह सभी का है..
कब जाओगे ?? 🤔
कब आएगी चैन की नींद ??
जा रहा हूँ... 😔 *मैं हूँ*
*साल दो हज़ार बीस*।।
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लौटाया भी है बहुत कुछ मैंने..
नदियों को *साफ़ पानी...*
पेड़ों को *हरियाली...*
पहाड़ों को *झरने...*
बेघर पशु-पक्षियों को *घर...*
धड़कनों को *साँसें...*
जीवन को *अर्थ...*
रिश्तों को *प्यार...*
बागों में *फूलों की बहार...*
सर्दी को *बर्फ़...*
गर्मी को *ठंडी हवाएँ...*
सूखे को *बरसात...*
ज़िंदगी को *मौसमी सौगात...*
रखना याद ,
*हर हार के बाद है जीत...*
जा रहा हूँ... ☹️
*मैं हूँ*
*साल दो हज़ार बीस*।।
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दुखों को नहीं ,
खुशियों को याद रखना...
मिली है जो सीख ,
उसे संभाल कर रखना...
*प्रकृति से ,*
*अब और मत खेलना*
संसार सब का है ,
याद रखना...
ज़्यादा नहीं , थोड़े की है ज़रूरत.
लालच भरी ज़िंदगी की ,
बदलनी है अब सूरत...
*खुशियों से भरा ,* साल
दो हज़ार इक्कीस है नज़दीक...
जा रहा हूँ... 😰
*मैं हूँ*
*साल दो हज़ार बीस* ।।
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