क्या गिले-शिकवे रखते हो, आज़ाद करो मुझे…२
क्या कंजूसी करते हो, दिल खोल कर बर्बाद करो मुझे!
में वक्त नहीं जो गुज़र जाऊंगा, दिन ढलने के बाद…२
खोलो सारे दरवाज़े और आबाद करो मुझे!
मुहोब्बत एक दरिया है, डूबना सभी को है जिसमें…२
क्यों डरते हो मुझसे, कूदो और पार करो मुझे!
छोड़ो सारी दुनिया को पीछे, दुनिया ज़ालिम है…२
में वफादार हूँ, आओ और प्यार करो मुझे!
-# kisi aur ki shayri,
-Maya