रातों में बाते गहराई से इश्क़ के नाम पर दिल को छू जाती है,
दिनों की धूप भी अक्सर नींद में मेरी पलको तले छुप जाती है।
गुम हुआ दिल कहीं माहिर हुआ जिंदगी में, की अब फुर्सत के लम्हे भी तो नहीं है,
दूर जाने का डर अदा किया जाए, पर खुदा तेरे दरबार में हमें मिला दे वो लकीर तो नहीं है,
दस्तूर ए गुजारिश के मंजिल में सफ़र तो सही नाप के चलता है,
डियर जिंदगी के ये चुने हुए पल को कहीं बार गिर कर भी सँभालता है,
वो कही बार दुनिया से रूठके मायुश हो के मेरे सीने से लगके दुनियाँ के सदमे हल्के करता है,
और अल्फ़ाज़ जख्म ए हया की तरह मेरी खामोशी से बोल के मेरे जीने की वजह का दस्तूर जाया करता है।
ये लफ़्ज़ों के जूठे आशियाने मेरे हिस्से में कहीं बार कमजोर बनके उसकी दिल्लगी की अहमियत को जेलता है,
फोन कितने भी कट जाए अंधेरों मे दिए उजाले की कहानी और सामने आते ही बेबसी की मासूमियत में दिलचस्पी लेता है।
DEAR ZINDAGI 🤗❣️