मेरे मोहब्बत की शायरी के अल्फाजों को मेरे मोहब्बत, की दास्तान मत समझ लेना,
मै अगर लिखती हू मोहब्बत के रुसवाइयों पे,
और मोहब्बत-ए-जिंदगी पे,
तो तुम मुझे मोहब्बत में खोई हुई मत समझ,
हां मानती हूं मैं मोहब्बत को,
मगर मोहब्बत करने वालों पर विश्वास नहीं करती,
कुछ अलग से है मेरे जिंदगी के उसूल,
तो मेरे उसूलों को अपनी सोच में गलत मत समझ लेना।।
-Shikha