ना ख्वाबों का एहसास था ,
ना ही चाहतों का सिलसिला था,
यह तो उस पल का दीदार था
जब तू मिला था ।
ना बात हुई,
ना ही नजरें मिली,
फिर भी सदियां गुजर जाए ऐसी मुलाकाते हुई
ना तूने देखा एक बार भी,
ना ही मेरी पलके उठी,
फिर भी नजरें ऐसे मिली मानो वर्षों कि ख्वाहिश मुकम्मल हुई।
"SA"
-Shikha