"मताधिकार का फर्ज"
- मधुकर के.चौहान "आशक"
प्रजातंत्र मारा मारा हैं,
भारतवर्ष हमारा है
वोट ही देश का आधार है ;
डूबते नेताओं की पतवार है।
युवा हमारे न्यारे -न्यारे
तेजस्विता, तपस्वीता, तत्परता के तारक...!
युवाओं का यूँ कहना है ;
अब तो चुप नहीं रहना है।
हमने तो अब ठाना है
मतदान करने जाना हैं।
हम हैं नए तो अंदाज क्यों हो पुराना
ई-वोटिंग का यह है जमाना...!!
पॉलिटिक्स इज ए डर्टी गेम
पॉलिटिक्स इज ए डर्टी गेम
नो...नो...नो...
जिन हाथों में शक्ति है
वोट देने की
उन हाथों में शक्ति है
शीश उतार लेने की
यहाँ तो सब गरबड घोटाला है!!
जिन्हें सौंपा देश का सुकान
वो कैसे हो बेइमान
आओ नेता बेईमानी को छोड़ो तुम
"बहुजन हिताय ", "बहुजन सुखाय " का मंत्र साधो तुम
आओ प्यारे, वीरों आओं
मताधिकार का फर्ज निभाओं
जनता जनार्दन मिलकर गाओ
प्यारा भारतवर्ष हमारा...
-मधुकर के.चौहान "आशक"
( 14/12/2011)