ये राधा भी इश्क़ का धागा बांध रही है कान्हा की तरह,
हर रोज नए दावे कर कसमें खा रही सच्ची होने की प्रीत।
ये कान्हा भी जानकर अंजान बन रहा राधा से रखने इश्क़,
केसी है ये इश्क़ की ज़िद्द और मोहोब्बत की रीत।
और बदलने वाली लकीर में बनी किस्से को भी जूठा कर रही,
और रुला रही भरी ठंड में कान्हा को बिन मौसम बरसात की जीत।
DEAR ZINDAGI 💞🌹