★★ वादा.....
सर से पांव तक तब ,
खुद को संवारा था हमने,
आईने में उस दिन ख़ुदको,
बारंबार निहारा था हमने।
मन में सवाल उठे थे हज़ार,
सबको सिरे से नकारा था हमनें,
दिमाग में भी हुई हलचल थी बहुत ,
हर पल को फिर भी संभाला था हमने।
गली के हर मोड़ ने रोका था हमें,
लिया तब किनारे का सहारा था हमने,
कदमों ने भी तब साथ था छोड़ा,
गिरते हुए खुद को उठाया था हमने।
खुद की हर अदा पर इतराते ख़ुद को,
ख़ुद की ही नज़र से बचाया था हमने,
डरते संभलते पहुंचे फिर उसी जगह,
कभी खुद को जहां पाया था हमने।
घूम घूम कर ढूंढा उसको ही हमनें वहां,
मिलने का जिससे सपना सजाया था हमने,
इंतजार में बैठ गए उस ही जगह आज भी,
आने का जहां वादा कराया था हमने।
सुबह से शाम ढल गई आज भी इंतजार में,
खुद को फिर आंसुओ में भिगाया था हमने,
लौट रहे हैं आज भी बिन मिले उनसे,
एक खुशी को आज फिर ठुकराया था हमने।
सुनो! तुम आज फिर भूल गए वादा अपना,
देखो !किया वादा आज भी निभाया था हमने...
jagGu parjapati ✍️🥰☺️