तेरा मेरी ज़िंदगी से चले जाना
ओर
तेरी यादों को दिल के पिंजरे में बंध कर देना
मेरी आदत सी हो गई थी।
आज अरसो बाद मेने बन्ध पिंजरे को खोलकर
तेरी सारी यादों को खुले आसमा में उड़ा दिया
मानो
तु मेरी ज़िंदगी कभी था ही नहीं।
मगर
यादें तो यादें हे..,,,,, सायद उसे भी आदत सी हो
गई बंध पिंजरे में रहेने की।