Covid - 2019
मेरे सपने में एक चिड़िया आती है,
देख के मुझे पूछे जाती है।
हो कहां तुम आजकल दिखते नहीं,
बस स्टॉप सुने, बजार खुलते नहीं।
एक दूसरा दिखता है ,
पता नहीं क्यों मुंह छिपाता है।
आजाद लगता था कभी,
उलझनों में कैद लगता है।
हुकुम चलाया करता था,अब इतना बेबस देखा है,
घरों में रहता है,पर बेघर सा लगता है।
बस हो गया अब हमे ना राज करना हैं,
अा जाओ तुम सब भी हमे साथ आगे निकलना है।
-Supriya