आजकल सभी रिश्ते भी अस्थायी लगते हैं
रिश्तों के मायने समय समय पर बदलते हैं
मतलब के समय वे करीब होते हैं
मुफलिसी में दूरी बना लेते हैं
रिश्ते अब बन गए मुखौटे हैं
इसमें औपचारिकता ज्यादा दिखती है
भावुकता और अपनापन कम ही मिलता है
कम बोलना और कम सुनना सभी को भाता है
किसी तरह इंसान इन रिश्तों को निभाता है