जर्रे जर्रे मे अक्स तेरा लगता हैl
जाने क्यो तू हवा सा लगता है़ ll
खाली न रहती है इक पल यादें मेरी l
हर खयाल मे तेरा ही जिक्र मिलता है ll
उगते सूर्य से लेकर ढ़लती हुयी रातों तक l
तेरी याद-ए-तपिश मे दिल मेरा जलता है ll
खामोशियों मे भी जाने कितने शब्द घुले है l
लव ख़ामोश मन चलता तूफान सा लगता है ll
ह्रदय वेदना भी ये घातक है बड़ी l
जिंदा इंसान भी मुर्दा सा लगता है ll
- RJ krish ✍️