इश्क़ में फरेबी, धोखेबाज का जख्म खुद के सीने को अदा करता है आशिक़,
जहन में आग लगा कर भी छाँव बरसता रहता है हर तड़पते सफ़र में आशिक़।
ये बूंद बूंद पानी जो निगाहों से बहकर दर्द-ए-लब्ज़ की प्यास बुजाता है,
वो गिलाशिकवा छोड़ कर जीने की उम्मीद को पल पल तोड़ता है आशिक़।
💞 DEAR ZINDAGI 💞