ये शिकायत नहीं है..
मेरी जा ये इल्तिज़ा है।
जो कुछ भी होता है,
एहसास इधर जगता है।
ये शिकायत...
तेरी ये अटखेलियां भरती है
मुझमें दर्द, खामोशी जो
दिल को मेरे चीर जाती है।
ये शिकायत...
तेरा बिन बोले ये खामोशी
चीरती है कानों को।
लिबास तू बदल बस,
छोड़कर गिरेबान को
ये शिकायत..
तुझे पता नहीं चलता.,
जो तू चलने नहीं देता।
जी रही फिर भी मुझे,
आजकल मुझे जीने नहीं देता ।
ये शिकायत...
मेरी बदुवाए तू ना ले,
बस दूर हो जा मुझ से।
किया है जो तूने
ना कहेंगे किसी से।
ये शिकायत..