लिया जन्म कारागार में,
माँ देवकी की गोद भराया...!!
यशोदा मैया का दुलार है पाया...
नन्दजी का लाल कहलाया...
गोपियो का माखनचोर खाया...
राधा की प्रीत में रास रचाया...
वन उपवन लीला रचयिता,
मोह जाल से सबको छुड़वाया...!!
दिया श्राप जब श्रीदामा ने,
राधा कृष्ण ने तब विरह है पाया...!!
प्रीत की डोर बंधी राधा से,
रुक्मणी संग विवाह रचाया...!!
प्रेम का पाठ पढ़ा के जग में,
कृष्णा से पहले राधा नाम लगाया...!!
कर्म का ज्ञान देकर श्री कृष्ण ने,
धर्म अधर्म का भेद समझाया...!!
कर के दुष्टो का नाश प्रभुने,
पूर्ण सन्सार में उजियारा फैलाया...!!
सत सत नमन करूँ में वन्दन
प्रीत के इस जोड़े ने धरती पर,
जीवन का सही महत्व समझाया...!!
कामिनी वर्मा