दाग
प्रेम आग में तन-मन जलते सदा।
खरा आदमी तपकर बनता सोना।
प्रेम में मिला प्रियतम तो सोने पे सुहागा।
कहलायेगा वह बड़ा सौभागा।
प्रेम की निशानी बन मांग में सुहाता।
कच्चा आदमी जलकर हो जाता खाक।
जगत में कट जाती उसकी नाक।
रोता रहेगा आदमी सदा अभागा।
जग ने कटु वचन के गोला बारूद दागा।
एक दाग बदनामी का जीवनभर लागा।
-दीपेश कामडी 'अनीस'