आंगन में खिले फूल को
कोई जहरीला कैसे माने
बसती हो जान जिन फूलों में
बगिया का माली उन फूलों से
दुराभाव क्या जाने
सिंचित किया जिन कलियों को
दूषित हवा कर गयी उन्हें बागी
इस बगावत की भनक
वो बागवान क्या जाने
खिलाया फूल विषम परिस्थिति में
किया जतन परवरिश में जिनकी
बागवान के समर्पण का मोल
वो कली क्या जाने
वो नन्हीं कली बनकर फूल
जब महकने लगी,
आ गए भँवरे अनेकों
आस पास गुंजन करने लगे
देख बागवान को ये बात
गुस्सा आ गया
न हो कोई नुकसान मेरे फूल को
ये सोच पहरा लगा दिया
भृमर था चालाक फूल था मासूम
भौंरे ने चाल खतरनाक चल दी
तेरा बागवान ही तेरा दुश्मन है
ये बात फूल के मन में भर दी
दुनिया की रीत से अनजान
उस फूल ने हत्या परिवार की कर दी
रह गया हैरान बागवान
क्या ये वही फूल है
जिसका बीज मैंने रोपा था
वो फूल जो मैंने खिलाया
उसमें तो महक थी ,खुशबू थी
जीवन का एक बसेरा था
इस नाजुक से फूल में
ये जहर कैसे भर गया
जिसे मंदिर में चढ़ाने की
रही तमन्ना मेरी
ये कब्र पर कैसे चढ़ गया
ये खुशबू वाला फूल मेरा
जहरीला कैसे हो गया
ये सोचते -सोचते वो बागवान
जीवन से अलविदा कर गया।।।।