दुनिया चाहे कुछ कहें
मैं तेरी दोस्ती को अमर कर दूंगा।
खुद चाहे बदनाम सहीं
मैं तेरा नाम महान कर दूंगा।।
इस जहां से उस जहां तक
दे लोग तेरी मिसालें।
मैं इतना तेरे बारे में लिखूंगा
लोग सुनाते रह जाए गाथाएं ।।
तुम चाहे खुद को ना समझ पाओ
मैं दुनियां को तेरे बारे में समझा दूंगा।
तुम चाहे खुद को दूर करो
मैं दुनिया को तेरे करीब कर दूंगा।।
तुम चाहे दोस्त बनाके भूल जाओ
तेरी दोस्ती को मैं याद रखूंगा।
तुम चाहे जितने अलग हो जाओ
मैं तेरी रूह के करीब सदा भटकुंगा।।
Author NR Omprakash