मायूस चेहरा सरसरी निगाहें
कह रही कुछ टुक-टुक
हाल मेरा बेहाल है
कैसे बताऊँ तुझको
जो विपत्ति में काम आए
वो मित्र कहलाता है
वरना तो सुख में
शत्रु भी पानी को लेकर आता है
पूंछा नहीं किसी ने हाल कैसा है तेरा
दुःख में सब अपने भी साथ छोड़ जाते है
रब कैसा ये जमाना है सब अपना भी बेगाना है
यादों के सहारे जीकर समय को बिताना है
वो भी क्या समय था सब साथ साथ चलते थे
आज भी क्या समय है खुद से सम्भलना पड़ता है
रब अर्ज है मेरी तू इस समय को बदल दे
जिसमे अपने भी सब बेगाने हो जाते है
ए खुदा तू दुःख को बदल दे ,तू दर्द को बदल दे
तू रोग को बदल दे, तू गरीबी को भी बदल दे
तू भेद को बदल दे ,तू भाव को बदल दे
जिससे कि हर सख्श के जाती को
देखा जाता है
मैं चाहता हूँ रब तू दुनिया बदल के रख दे
दुनिया मे रहने वाले परिंदों को
दिक्कत न हो कोई भी
ख्वाइश मेरी ये मौला तू कब करेगा पूरी
इन्तजारों के सहारे जी लूंगा ज़िन्दगी को