बड़े शौक से महोब्बत की उड़ान भरी थी हमने की आसमान खुला है अब तो जिंदगी भर उड़ पाऊँगा,
और,
वोह भी बहोत उतावले थे जुदा होने को हमसे आसमानसे किसी और लंबी उड़ान के लिए,
फिर क्या,
उनके शौक अलग थे और हमारा तो बस उन्हीं के साथ उड़ते रहेना का शौक था,
मगर क्या कहूँ आजकल की महोब्बत को जो आसमान को भी बाँट दिया करते है और शौक बदलते रहते हैं,
और हम जैसे परिंदे उस शौकीन महोब्बत की उड़ान को सच्चाई मानते रहे,
बड़ी मुश्किल से गुज़रता रहेता ख़याल तुम्हारा जब भी हम कोई शौकीन चीज़ देखते है,
और इतना ही नहीं टूटा हुआ आइना जैसे जुड़ा नहीं करते वैसे ही मेरी महोब्बत के पंख भी अब उड़ नहीं पाएँगे...