मेरे दिल की धड़कनों में उतर कर देखो
तुम कभी मेरी आंखों में बसर कर देखो
हर तरफ़ शोर है चर्चा है बस तुम्हारा ही
तुम कभी मेरे ख्यालों में संवर कर देखो
मेरी हर बात तुम्हीं से शुरू खत्म भी तुमपर
तुम कभी मेरी वफाओं का सफ़र कर देखो
रही न हसरतें बाकी तुमसे मिलने के बाद
तुम कभी मेरी जुल्फ़ों में सहर कर देखो
तमाम दर्दों गमों की मैं गुजरी डगर भूल गयी
तुम कभी मोहब्बत की राहों से गुजर कर देखो
मिले थे कितने मिलेंगे कई कुछ हिसाब नहीं
तुम कभी आशियां में सिर्फ मेरे ठहर कर देखो
मेरे दिल की धड़कनों में उतर कर देखो
तुम कभी मेरी आंखों में बसर कर देखो
#बसर