लंबे दिन सूने-सूने , तनहा लंबी-लंबी रातें हैं
दिल में हैं बस यादें तेरी सुर्ख लबों पर बातें हैं
मस्ती में जो पल बीते
तेरे संग मोजों की रवानी में
वो शोख शरारती बातें तेरी ,
अल्हडपन की जवानी में
करके याद अकेलेपन में
आँखें बरस रही हैं ऐसे
जैसे सावन की बरसातें है
दिल में हैं बस तेरी यादें,
सुर्ख लबों पर बाते हैं
लंबे दिन सूने-सूने , तनहा मेरी लंबी रातें हैं
दिल में हैं बस यादें तेरी सुर्ख लबों पर बातें हैं