नेता और खरबूजा
आठवीं कक्षा के एक छात्र को खरबूजे पर निबंध लिखने को कहा गया। उसने खरबूजे की तुलना नेता से करते हुए उसकी अनोखी व्याख्या की।
खरबूजे में और नेता में अद्भुत समानता पायी जाती है। खरबूजा भी गोल होता है और नेता भी जनता को गोलमोल उत्तर देता है। खरबूजा खरबूजे को देखकर रंग बदलता है नेता भी सत्ता की कुर्सी को देखकर अपने में परिवर्तन लाकर कभी पक्ष और कभी विपक्ष में बैठता है। खरबूजा मीठा होता है और खाने में बहुत अच्छा लगता है। नेता की वाणी भी शहद के समान मीठी होती है और ये देश के धन को कब और कैसे हड़पकर अपनी जेबें भरता है इसे कोई नहीं समझ पाता।
खरबूजा लाल व हरे रंग का होता है। नेता भी अपने असम्मान पर लाल और अपनी प्रशंसा पर हरे रंग का आभास कराता है। खरबूजे की कीमत उसके आकार प्रकार और वजन पर निर्भर रहती है इसी प्रकार नेता का दाम भी उससे कराये जाने वाले हर काम के प्रकार पर निर्धारित होता है।
खरबूजा जब पक जाता है तो जल्दी से जल्दी उसका उपयोग न करने पर वह शीघ्रता से खराब हो जाता है। नेता का उपयोग भी समय रहते न करने पर वह किसी काम का नहीं रहता और चुनाव में जनता उसे हराकर फेक देती है। नेता और खरबूजे में एक ही असमानता है वह यह कि खरबूजा स्वास्थ्य के लिये लाभप्रद होता है किन्तु नेता देश के स्वास्थ्य के लिये नुकसान दायक होता है और इन्हीं के कारण देश में मंहगाई, भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी जैसी बीमारियां फैली हुई हैं।