#अपारंपरिक
प्रखर पिपासा पंडित पोथी,
जलधि जोडी जलसे झोंटी।
घरमें घटघट घाट घुसेडे,
काज करे कुरानी कोटि।
गाँव गवैया, गीता गाए;
चेला चंगुल चापे चोटी।
नगर नवेले नारण नाती,
खाज खुरेदे खाली खोटी।
अभिनव आगे, आगबबूला;
छोटा छाने छन्नी छोटी।
हरि हालत हल्की हर होती,
बाँच बिगाडे बोटी बोटी..!!
देस दहाडे, दहशत दर्पण ;
मगर मनाये, मछली मोटी....
© लीना प्रतीश