दो पल की है ये ज़िन्दगी, मैं हर लम्हे मैं ख़ुश हुँ |
सफलता ना मिले कोई बात नहीं मैं संघर्ष मैं ख़ुश हुँ ||
दुख मिले, सुख मिले मैं हर हाल मैं ख़ुश हुँ ||
अभाब मैं ख़ुश हुँ, स्वभाब मैं ख़ुश हुँ ||
आशा की किरण ना दिखे भी तो
निराशा के अंधकार मैं ख़ुश हुँ |||
पूर्णता मैं ख़ुश हुँ, शून्यता मैं ख़ुश हुँ |
गैरों के अपने पन से ख़ुश हुँ
अपनों के दुत्कार से ख़ुश हुँ ||
दोस्त की ईमानदारी से ख़ुश हुँ
दुश्मन की गद्दारी से ख़ुश हुँ....
मंज़िल दूर है तो क्या हुआ
मैं सफर से ख़ुश हुँ, रास्ते से ख़ुश हुँ...
जीबन का सही अर्थ जब से समझ आगया
मैं चारो तरफ की कोलाहल से ख़ुश हुँ
अन्दर की खामोशी से ख़ुश हुँ.