समय
वे दिन कुछ और थे, ये दिन कुछ और हैं,
कल वहाँ शाम थी, आज यहाँ भौर है,
कल वहाँ शांत था, आज यहाँ शोर है,
कल जहाँ लहरे थी, आज वहीँ हिलोर है,
वे दिन कुछ और थे...ये दिन कुछ और हैं।।
प्यार भरे रिश्तो से ही जिंदगी की डोर है,
नही तो ये जिंदगी एक घटा घनघोर है,
प्रेम संग जीना तो फिर जीना ही कुछ और है
प्यार बिना जिंदगी एक सजा का दौर है,
वे दिन कुछ और थे...ये दिन कुछ और हैं।।
पाना और खोना ये तो समय का जोर है,
हर एक जीव में एक अजब सी होड़ है,
लेना और देना यही विपदा का गौड़ है
समय ही बलिष्ठ है, बाकि सब कमजोर है।
वे दिन कुछ और थे...ये दिन कुछ और हैं।।
(बचपन की एक डायरी से...)