हमसफ़र
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जो तुम मेरे हमसफ़र हो
सफर बहुत सुहाना है
हँसते हर कदम हैं हम
साथ लत बन गया है
मेरी आँखे मुस्कुराती हैं
लबों से फूल झड़ते हैं
चहकती हर कदम हूँ मैं
इठलाना हर सूं हो गया है
हर कदम हमकदम हुए हैं
कदमों तले जमाना है
हर दिन बहुत सुहाना है
हर रात का जगमगाना है
धड़कने भी समझती है
जुबां खामोश लफ्जों की
इशारों में बात होती है
हर पल रूमानी होता है
न दर्द है तुम्हे कोई
न मेरी आँखों में आंसू है
हवा की खामोश नमी में
अहसासों का गर्म साया है
मैं जैसी थी,नही मैं वैसी
तुम भी तो देखो तुम न रहे
रंग कर एक दूजे के रंगों में
अपने रंग हम सारे भूले
अंधेरों का खौफ नही मुझे
छायी चांदनी तुम्हारी है
न धूप है तुम पर कोई
मेरे आँचल की ठंडक है
सिमटे हुए हैं एक दूजे में
दूरी दिलजलों से बना ली है
खुदा की नेमत कहूँ मैं इसे
ख्वाब मेरा मुक्कमल हुआ है
न मैं हीर ही बनी कभी
न तुम रांझे ही कहलाये
फिर भी एक दूजे से ही
साँसो की सरगम चलती जाये
विनय......दिल से बस यूँ ही