मेरी माँ है तू
स्वार्थ की टेढ़ी दुनिया में
परमार्थ का दूसरा नाम है तू
सब तीर्थ मुझे जहाँ छोटे लगे
ऐसा एक तीरथ धाम है तू
वंचक हैं जब सब ओर यहाँ
तब त्याग का बस प्रमाण है तू
सर्वस्व लुटा दे औरों पर
वह एकमात्र इंसान है तू
संघर्ष के घोर अंधेरे में
उगते सूरज-सी उजास है तू
कभी हार से जन्य निराशा में
जीत की जगती आस है तू
जून की गर्म हवाओं में
ज्यों पहाड़ी शीत बयार है तू
कह सकूँ कि विषम दशाओं में
प्रतिक्षण एक मृदु एहसास है तू
तुझे लेकर लिखे मेरे गीतों में
शृंगार तलाशती यह दुनिया
नहीं जानती कि मेरी माँ है तू