मैंने सबकुछ तन मन धन अर्पण किया।
साथ निभाने का जीवनभर वचन दिया।
सारे स्वार्थों का एक साथ तर्पण किया।
अहं त्याग कर तुझे पूर्ण समर्पण किया।
तेरे आगे पीछे सदा ही मैंने नर्तन किया ।
तेरे लिए मैंने खुद में ही परिवर्तन किया।
जो अच्छा लगा तुझे वही पुनरावर्तन किया।
हर कदम साथ रहकर पथप्रदर्शन किया।
मन चक्षु से तेरा ही हमेशां दर्शन किया।
तुझ पर ही चिर संचित प्रेम वर्षण किया।
तेरे गुणों का जग में मन से चित्रण किया।
तेरे कार्यों का ही कलम से कीर्तन किया।
@दीपेश कामडी 'अनीस'
03, जुलाई- 2020